चार बेटों ने छोड़ा साथ, बेटी बनी सहारा: पिता को कंधा देकर दी मुखाग्नि, भावुक कर गई वाराणसी की घटना

वाराणसी। रिश्तों और जिम्मेदारियों की मिसाल पेश करने वाली एक भावुक घटना वाराणसी में सामने आई है, जहां चार बेटों के होते हुए भी एक बेटी ने अपने पिता की अंतिम यात्रा का पूरा दायित्व निभाया। पिता के निधन के कई घंटे बाद भी जब कोई बेटा अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा, तब बेटी ने स्वयं कंधा देकर और मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया।
समाजसेवी अमन कबीर के अनुसार गुरुवार दोपहर पुलिस हेल्पलाइन 112 से सूचना मिली कि अंधरापुल के नीचे एक युवती अपने पिता के शव के पास बैठी है। सूचना मिलने पर वह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद युवती पूजा देवी ने बताया कि उसके चार भाई हैं, लेकिन पिता की मौत के करीब छह घंटे बाद भी कोई अंतिम संस्कार के लिए नहीं आया।
पूजा देवी ने भावुक होकर कहा कि परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे भी नहीं हैं। उन्होंने मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि यदि कोई आगे नहीं आएगा तो वह स्वयं बेटी होने के साथ-साथ बेटे का भी कर्तव्य निभाएंगी।
इसके बाद समाजसेवी संस्था के सहयोग से शव को वाहन के माध्यम से हरिश्चंद्र घाट पहुंचाया गया। घाट पर पूजा देवी ने अपने पिता रंजन जायसवाल की अर्थी को कंधा दिया और पूरे सम्मान के साथ उन्हें मुखाग्नि भी दी। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
बताया गया कि लगभग 100 वर्ष की आयु पूरी कर चुके रंजन जायसवाल ने अपने बच्चों का पालन-पोषण कर उन्हें बड़ा किया था, लेकिन उनकी अंतिम यात्रा में चारों बेटे अनुपस्थित रहे। ऐसे समय में बेटी ने आगे बढ़कर अपने पिता को सम्मानजनक विदाई दी।
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने पूजा देवी के साहस, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां भी परिवार की उतनी ही बड़ी ताकत होती हैं जितने बेटे। अमन कबीर सेवा न्यास की ओर से अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था कराई गई और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान की गई।
यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि परिवार का असली सहारा केवल बेटे ही नहीं, बल्कि बेटियां भी बन सकती हैं, जो हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का साहस रखती हैं।

