समान शिक्षा की मांग को लेकर निकली तीन दिवसीय पदयात्रा का समापन, सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने की उठी मांग

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर निकली तीन दिवसीय पदयात्रा का बुधवार को दुर्गाकुंड स्थित आनंद पार्क में समापन हुआ। मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही से शुरू हुई यह यात्रा धूमिल के गांव खेवली और लोकबंधु राजनारायण की जन्मस्थली गंजारी से होते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) पहुंची, जहां छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यात्रियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने “राष्ट्रपति का बेटा हो या चपरासी की संतान, सबकी शिक्षा हो एक समान” के नारे लगाए। पदयात्रा का नेतृत्व मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी डॉ. संदीप पांडेय ने किया। उनका खादी की माला पहनाकर स्वागत किया गया। समापन सभा में वक्ताओं ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी नागरिकों का अधिकार है और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना सामाजिक न्याय तथा समान अवसर की अवधारणा को साकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और महंगी होती पढ़ाई से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। डॉ. संदीप पांडेय ने कहा कि पहले सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक व्यवस्था, प्रशिक्षित शिक्षक, प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय उपलब्ध होते थे, लेकिन समय के साथ सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था कमजोर हुई है। उनका कहना था कि इसे आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों के साथ सशक्त बनाया जाना चाहिए।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों, संसाधनों की कमी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किए बिना केवल नीतिगत बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे।वक्ताओं ने उच्च शिक्षा में बढ़ते निजीकरण, प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया और छात्रों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का भी उल्लेख किया। उन्होंने सरकारी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों को सशक्त बनाने, शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने तथा समान विद्यालय प्रणाली लागू करने की मांग दोहराई।
कार्यक्रम में फादर आनंद, नंदलाल मास्टर, प्रो. आर.के. मंडल, संजीव सिंह, वीरेंद्र यादव, कुसुम वर्मा, बीएचयू छात्र शांतनु सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र, शिक्षक और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। समापन अवसर पर जनगीतों की प्रस्तुति भी दी गई और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ पदयात्रा का समापन हुआ।

