ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में 203 मौतें, इंटरनेट बंद; संसद की अमेरिका को खुली चेतावनी

नई दिल्ली। ईरान में सत्ता के खिलाफ चल रहे देशव्यापी प्रदर्शनों के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। बीते करीब दो सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और दमनात्मक कार्रवाइयों में अब तक 203 लोगों की मौत की खबर है, जबकि लगभग 2,600 लोगों को हिरासत में लिया गया है। सरकार की ओर से इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद किए जाने के कारण जमीनी हालात की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल हो गया है।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव में मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी का दावा है कि अब तक मारे गए लोगों में 162 प्रदर्शनकारी और 41 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। हालांकि, ईरानी सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर हताहतों का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया है।
इस बीच ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो जवाब में अमेरिकी और इस्राइली सैनिकों को भी निशाना बनाया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राजधानी तेहरान समेत देश के कई बड़े शहरों में दो हफ्ते से अधिक समय से प्रदर्शन जारी हैं।
संसद सत्र के दौरान यह चेतावनी उस वक्त दी गई, जब कई सांसद नारेबाजी करते हुए आसन के पास पहुंच गए और अमेरिका विरोधी नारे लगाए। विदेश में मौजूद विश्लेषकों का कहना है कि सूचना पर लगी पाबंदियों के चलते सुरक्षा बलों के सख्त रवैये को और बढ़ावा मिल सकता है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान के प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर मदद के लिए तैयार है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों से अवगत कराया गया है, हालांकि इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उधर, अमेरिकी विदेश विभाग ने भी संकेत दिए हैं कि ट्रंप जो कहते हैं, उसे अमल में लाने से पीछे नहीं हटते।

