150 साल तक इंसानी उम्र बढ़ाने की दिशा में रूस का बड़ा कदम, पुतिन समर्थित परियोजना पर तेज़ी से चल रहा शोध

नई दिल्ली, जनमुख अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़। रूस मानव जीवन की अवधि बढ़ाने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक कार्यक्रम पर काम कर रहा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन से संचालित इस परियोजना में जीन थेरेपी, पुनर्योजी चिकित्सा (रेजेनरेटिव मेडिसिन), 3डी बायोप्रिंटिंग और कृत्रिम अंगों के विकास जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर शोध किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की अनुमानित लागत लगभग 26 अरब डॉलर (करीब 22 लाख करोड़ रुपये) बताई जा रही है।
रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि भविष्य में इंसानों की औसत आयु 150 वर्ष तक पहुंचाने की संभावनाओं पर अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्ष्य फिलहाल सैद्धांतिक स्तर पर है और इसे वास्तविकता में बदलने में कई दशक लग सकते हैं।
परियोजना के तहत कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए जीन थेरेपी, 3डी बायोप्रिंटिंग के माध्यम से जीवित ऊतकों का निर्माण और आनुवंशिक रूप से संशोधित मिनी-पिग्स में मानव अंग विकसित करने जैसी तकनीकों पर काम हो रहा है। इसके अलावा क्रायोथेरेपी और अंगों की मरम्मत व प्रतिस्थापन संबंधी अनुसंधान भी जारी हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार वे पहले ही मानव उपास्थि (कार्टिलेज) ऊतक और एक कार्यशील चूहे की थायरॉइड ग्रंथि को बायोप्रिंट करने में सफलता प्राप्त कर चुके हैं। अब उनका लक्ष्य वर्ष 2030 तक पूर्ण मानव अंगों के निर्माण और प्रत्यारोपण की क्षमता विकसित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में क्षतिग्रस्त अंगों को नियमित रूप से बदला या पुनर्जीवित किया जा सके, तो मानव जीवनकाल में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकती है। हालांकि जीन थेरेपी और पशुओं में मानव अंग विकसित करने जैसी तकनीकों को लेकर नैतिक और वैज्ञानिक बहस भी जारी है।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की निगरानी में पुतिन की बेटी और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट मारिया वोरोन्त्सोवा की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। उनके साथ प्रसिद्ध रूसी भौतिक विज्ञानी मिखाइल कोवलचुक भी परियोजना के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। कोवलचुक का कहना है कि अमरता की बात करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन विज्ञान तेजी से उस दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां मानव अंगों की मरम्मत और प्रतिस्थापन सामान्य प्रक्रिया बन सकती है।
हालांकि वैज्ञानिक समुदाय का एक बड़ा वर्ग 150 वर्ष की आयु तक पहुंचने के दावों को अभी प्रमाणित नहीं मानता, फिर भी रूस की यह पहल दुनिया के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी बायोमेडिकल कार्यक्रमों में गिनी जा रही है। इस परियोजना ने दीर्घायु अनुसंधान और मानव जीवन विस्तार की वैश्विक दौड़ को नई गति देने का काम किया है।

