गंगा में मिला प्राचीन शिवलिंग, मौर्यकालीन होने का दावा; जांच में जुटा पुरातत्व विभाग

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। गंगा नदी में मछली पकड़ने गए मछुआरों के जाल में एक विशाल शिवलिंग मिलने से क्षेत्र में कौतूहल और श्रद्धा का माहौल है। यह घटना सुजाबाद-डोमरी क्षेत्र की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बरामद शिवलिंग अत्यंत प्राचीन है और इसका संबंध मौर्यकालीन सभ्यता से हो सकता है। फिलहाल पुरातत्व विभाग इसकी जांच में जुट गया है।
जानकारी के अनुसार, रविवार को मछुआरे रोज की तरह गंगा में जाल डालकर मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान उनका जाल अचानक अत्यधिक भारी हो गया। जाल को बाहर निकालने के लिए करीब डेढ़ दर्जन लोगों की मदद लेनी पड़ी। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद जब जाल को किनारे लाया गया तो उसमें एक विशाल शिवलिंग फंसा हुआ मिला।
मछुआरों के मुताबिक, शिवलिंग का वजन करीब दो क्विंटल है। बरामदगी के बाद स्थानीय लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और घाट के समीप स्थित गंगा मंदिर में शिवलिंग को स्थापित कर दिया। मंदिर के पुजारी लाल बाबू ने धार्मिक अनुष्ठान के बाद इसकी स्थापना कराई।
शिवलिंग मिलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि शिवलिंग करीब 2500 वर्ष पुराना हो सकता है और इसका संबंध मौर्यकालीन इतिहास से है। कुछ जानकारों का मानना है कि जिस काले पत्थर से इसका निर्माण हुआ है, वह नेपाल क्षेत्र में पाए जाने वाले पत्थरों से मिलता-जुलता है।मामले की सूचना मिलने पर पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और शिवलिंग का निरीक्षण किया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शिवलिंग काफी पुराना प्रतीत होता है, लेकिन इसकी वास्तविक आयु और ऐतिहासिक महत्व का निर्धारण विस्तृत जांच और अध्ययन के बाद ही किया जा सकेगा।
फिलहाल शिवलिंग को मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया है और स्थानीय लोगों में इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

