किस घड़ी जुबान पर विराजती हैं मां सरस्वती? इस समय बोले गए शब्द बन सकते हैं सच

अक्सर हमारे बड़े-बुजुर्ग समझाते हुए कहते हैं— “हमेशा अच्छा बोलो, क्या पता किस घड़ी मां सरस्वती जुबान पर बैठी हों।” यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में गहराई से जुड़ी एक आध्यात्मिक मान्यता है। विश्वास किया जाता है कि दिन-रात के 24 घंटे के चक्र में एक ऐसा पवित्र और रहस्यमयी समय आता है, जब विद्या और वाणी की देवी मां सरस्वती साक्षात मनुष्य की जिह्वा पर विराजमान होती हैं।मान्यता है कि उस विशेष क्षण में मुख से निकला हर शब्द—चाहे वह आशीर्वाद हो, कामना हो या अनजाने में कही गई कोई नकारात्मक बात—ब्रह्मांड की ऊर्जा से जुड़कर सच होने की दिशा में बढ़ जाता है। इसलिए उस समय शब्दों और विचारों पर विशेष संयम रखने की सलाह दी जाती है।
शास्त्रों के अनुसार कौन सा है वह विशेष समय?
विद्वानों और शास्त्रों के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त और उसके आसपास का समय सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है।
-सुबह लगभग 3:20 से 3:40 बजे तक का समय कई आचार्यों के अनुसार अत्यंत शुभ और शक्तिशाली होता है। इस दौरान वातावरण शांत, शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
-एक अन्य मान्यता के अनुसार, दिन या रात में 1:10 से 1:15 बजे तक का समय भी मां सरस्वती के आगमन से जुड़ा माना जाता है।
हालांकि, अधिकांश विद्वान सूर्योदय से पहले का शांत समय, यानी सुबह 3 से 6 बजे के बीच को सबसे प्रभावी मानते हैं।
इस समय क्या करना चाहिए?
सकारात्मक वाणी अपनाएं: विशेषकर सुबह उठते ही किसी के बारे में बुरा न बोलें।
अपने लक्ष्य दोहराएं: यदि कोई सपना या उद्देश्य है, तो उसे इस समय मुख से बोलें। माना जाता है कि ब्रह्मांड उस संकल्प को स्वीकार करता है।
अपशब्दों और बद्दुआ से बचें: गुस्से में खुद को या दूसरों को नकारात्मक शब्द कहना नुकसानदायक हो सकता है।
वैज्ञानिक नजरिया क्या कहता है?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो सुबह का समय अवचेतन मन के सबसे सक्रिय होने का होता है। उस वक्त जो हम सोचते या बोलते हैं, मस्तिष्क उसे सच मानकर उसी दिशा में हमें प्रेरित करता है। आधुनिक मनोविज्ञान में इसे Law of Attraction कहा जाता है। इसलिए चाहे आस्था हो या विज्ञान—दोनों ही यह संकेत देते हैं कि शब्दों की ताकत को हल्के में न लें। खासकर उन पलों में, जब मन, शरीर और वातावरण सबसे अधिक सकारात्मक ऊर्जा से जुड़े होते हैं।

