पॉक्सो मामले में शंकराचार्य को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

प्रयागराज, जनमुख न्यूज़। उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अहम राहत मिली है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है और मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत में निर्णय सुनाए जाने के दौरान मौजूद समर्थकों ने तालियां बजाईं।
हाईकोर्ट ने करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आया जा सकता और इसके लिए असाधारण परिस्थितियां होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला भी दिया।
वहीं शंकराचार्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. पी.एन. मिश्र और हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने तर्क दिया कि यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है। उन्होंने कहा कि पहले 18 जनवरी (अमावस्या) को मारपीट की शिकायत दी गई थी, जिस पर केस दर्ज नहीं हुआ। बाद में पॉक्सो के तहत नई अर्जी दाखिल की गई, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।
बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता स्वयं आपराधिक मामलों में नामजद रहा है और उसके खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। साथ ही यह सवाल उठाया गया कि कथित पीड़ित बच्चों को अब तक बाल कल्याण समिति के समक्ष क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया और उनके अभिभावकों की स्थिति क्या है। इस पर अदालत ने सरकार से बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी।
बचाव पक्ष ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि बच्चों का मेडिकल परीक्षण कथित घटना के लगभग एक माह बाद कराया गया। वहीं सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता-पिता को सौंप दिया है।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अपना अंतिम फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

