मकर संक्रांति पर सूर्य देव के 108 नामों का जाप: दरिद्रता और रोग दूर करने का दिव्य उपाय

हिंदू शास्त्रों में सूर्य देव को जगत की आत्मा और प्रत्यक्ष देवता माना गया है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब उनकी उपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस शुभ दिन पर सूर्य देव के 108 दिव्य नामों का श्रद्धापूर्वक स्मरण केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन से दरिद्रता, रोग और मानसिक अंधकार को दूर करने का प्रभावशाली उपाय माना गया है।
मान्यता है कि सूर्य देव के नामों का नियमित जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आती है। साथ ही यह साधना स्वास्थ्य, यश, मान-सम्मान और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। मकर संक्रांति पर विशेष रूप से प्रातःकाल स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर यदि इन नामों का जप किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इसी आस्था के साथ इस मकर संक्रांति पर श्रद्धालु सूर्य देव के 108 नामों का जाप कर सुख, शांति और अपार समृद्धि की कामना करते हैं।
सूर्य देव के 108 नाम
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ निखिलागमवेद्याय नमः।
ॐ दीप्तमूर्तये नमः।
ॐ सौख्यदायिने नमः।
ॐ श्रेयसे नमः।
ॐ श्रीमते नमः।
ॐ नित्यानन्दाय नमः।
ॐ ऐं इष्टार्थदाय नमः।
ॐ सम्पत्कराय नमः।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
ॐ तेजोरूपाय नमः।
ॐ परेशाय नमः।
ॐ अं सुप्रसन्नाय नमः।
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ कवये नमः।
ॐ सकलजगतांपतये नमः।
ॐ सौख्यप्रदाय नमः।
ॐ आदिमध्यान्तरहिताय नमः।
ॐ भास्कराय नमः।
ॐ ग्रहाणांपतये नमः।
ॐ वरेण्याय नमः।
ॐ तरुणाय नमः।
ॐ परमात्मने नमः।
ॐ हरये नमः।
ॐ रवये नमः।
ॐ अहस्कराय नमः।
ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः।
ॐ अमरेशाय नमः।
ॐ अच्युताय नमः।
ॐ आत्मरूपिणे नमः।
ॐ अचिन्त्याय नमः।
ॐ अन्तर्बहिः प्रकाशाय नमः।
ॐ अब्जवल्लभाय नमः।
ॐ कमनीयकराय नमः।
ॐ असुरारये नमः।
ॐ वन्दनीयाय नमः।
ॐ इन्दिरामन्दिराप्ताय नमः।
ॐ भानवे नमः।
ॐ इन्द्राय नमः।
ॐ इज्याय नमः।
ॐ विश्वरूपाय नमः।
ॐ अरुणाय नमः।
ॐ इनाय नमः।
ॐ अनन्ताय नमः।
ॐ अखिलज्ञाय नमः।
ॐ अच्युताय नमः।
ॐ अखिलागमवेदिने नमः।
ॐ आदिभूताय नमः।
ॐ आदित्याय नमः।
ॐ आर्तरक्षकाय नमः।
ॐ असमानबलाय नमः।
ॐ करुणारससिन्धवे नमः।
ॐ शरण्याय नमः।
मकर संक्रांति पर इन नामों का श्रद्धा और विश्वास के साथ जाप करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में नई ऊर्जा, उजास और समृद्धि का संचार होता है।

