नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया, तीन आरोपी गिरफ्तार

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। कमिश्नरेट वाराणसी की साइबर क्राइम सेल और रोहनिया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नौकरी दिलाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से मोबाइल फोन, क्यूआर कोड, फर्जी आधार कार्ड समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, प्रतिबिंब पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान नौकरी दिलाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी के मामलों का खुलासा हुआ। छत्तीसगढ़ निवासी शिकायतकर्ताओं धनलाल भास्कर और रिंकू भास्कर से क्रमशः 6,550 और 7,550 रुपये की ठगी किए जाने की पुष्टि होने के बाद साइबर सेल ने जांच शुरू की।जांच में सामने आया कि ठगी की रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने रोहनिया थाना क्षेत्र के केशरीपुर स्थित एक मकान पर छापा मारकर बलिया निवासी कृष्ण कुमार और वाराणसी निवासी रोशनी प्रजापति को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में पता चला कि दोनों अपने सहयोगी प्रणव मिश्रा के साथ मिलकर “गुडविल इंडिया मैनेजमेंट ग्रुप ऑफ कंपनी” के नाम से कार्यालय संचालित कर रहे थे। गिरोह रोजगार मेलों और अन्य माध्यमों से बेरोजगार युवाओं का डाटा जुटाता था और उन्हें विभिन्न कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था।आरोपी टेली-कॉलर के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क कर चयन और प्रशिक्षण पत्र भेजते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, पुलिस वेरिफिकेशन, ड्रेस, ट्रेनिंग, आवास और भोजन शुल्क के नाम पर उनसे धनराशि वसूली जाती थी।
कृष्ण कुमार की निशानदेही पर पुलिस ने जगतपुर स्थित एक फ्लैट से गिरोह के तीसरे सदस्य आशुतोष सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, विभिन्न कंपनियों के नाम से बनाए गए आई-कार्ड, आवेदन पत्र और प्रचार सामग्री बरामद की गई। फ्लैट में मौजूद तीन युवकों ने पुलिस को बताया कि उन्हें नौकरी का झांसा देकर वाराणसी बुलाया गया था। हालांकि नियुक्ति देने के बजाय उन्हें प्रशिक्षण के नाम पर रोककर प्रचार-प्रसार और उत्पाद बिक्री जैसे कार्य कराए जा रहे थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर युवाओं को भ्रमित करता था। बरामद मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, चयन पत्र और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई गई है और सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए मामले की विस्तृत जांच जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है।

