होर्मुज संकट पर वैश्विक बैठक, भारत ने कहा—समुद्री रास्तों पर निर्बाध आवाजाही जरूरी

नई दिल्ली, जनमुख न्यूज़। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को 60 से अधिक देशों के विदेश मंत्रियों ने वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया। इस अहम चर्चा की पहल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer की ओर से की गई, जबकि बैठक की अध्यक्षता Yvette Cooper ने की।
भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हिस्सा लेते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर देश का स्पष्ट रुख रखा।
भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही हर देश का अधिकार है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
विदेश सचिव ने यह भी कहा कि होर्मुज संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। भारत ने बैठक में खास तौर पर खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। बताया गया कि हालिया हमलों में भारत ने अपने नाविकों को खोया है, जो गंभीर चिंता का विषय है।भारत ने स्पष्ट किया कि इस संकट का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत सुरक्षित और निर्बाध समुद्री परिवहन का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि हालिया प्रयासों के चलते भारतीय ध्वज वाले 6 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुके हैं।
भारत ईरान समेत अन्य देशों के संपर्क में है, ताकि LPG और LNG जैसी जरूरी आपूर्ति बाधित न हो।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि होर्मुज में जहाजरानी सेवाओं को सामान्य करना आसान नहीं होगा। इसके लिए सैन्य, कूटनीतिक और समुद्री सहयोग का संयुक्त प्रयास जरूरी है।हालांकि, उन्होंने सैन्य हस्तक्षेप की मांग को लेकर Donald Trump की अपील को खारिज कर दिया।
चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने कहा कि होर्मुज संकट ईरान से जुड़े तनाव का परिणाम है और जब तक युद्ध जारी रहेगा, हालात सामान्य नहीं होंगे। उन्होंने तत्काल युद्धविराम की अपील भी की। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारत समेत कई देश अब इस संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दे रहे हैं।

