एसएसबी जवान शंभूनाथ सिंह का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही मातम, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

बलिया, जनमुख न्यूज़। तिरंगे में लिपटा सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान शंभूनाथ सिंह का पार्थिव शरीर जैसे ही इब्राहिमाबाद गांव पहुंचा, पूरे गांव में मातम छा गया। पिता ददन सिंह, मां मलावती देवी, पत्नी पूजा सिंह और दोनों पुत्र निखिल व यश का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। शहीद जवान की अंत्येष्टि पचरुखिया गंगा तट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई, जहां एसएसबी के जवानों ने अंतिम सलामी दी।
इब्राहिमाबाद गांव निवासी 35 वर्षीय शंभूनाथ सिंह, पिता ददन सिंह, एसएसबी की 41वीं बटालियन में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में तैनात थे। बटालियन से आए अधिकारियों के अनुसार, 31 जनवरी को परेड में शामिल होने जाते समय वह परेड ग्राउंड में अचानक गिर पड़े। साथी जवान उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान एक फरवरी तड़के उनकी मौत हो गई।
हालांकि मृतक के भाई पंकज सिंह सहित परिजनों ने मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि शंभूनाथ सिंह की मौत गिरने से नहीं हुई, बल्कि उनके शरीर पर कई चोटों के निशान मिले हैं, जिससे पिटाई कर हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
सोमवार सुबह जब शव गांव पहुंचा तो परिजनों का दर्द छलक पड़ा। मां, पिता और पत्नी दहाड़े मारकर रोने लगे। पत्नी पूजा बार-बार बेहोश हो रही थी। 10 वर्षीय पुत्र निखिल और 8 वर्षीय पुत्र यश अपने पिता के शव से लिपटकर बिलखते रहे, जिसे देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश सिंह और भाजपा नेता निर्भय सिंह गहलौत ने परिजनों को संभालने का प्रयास किया।
निर्भय सिंह गहलौत ने बताया कि शंभूनाथ सिंह छह भाइयों में चौथे नंबर पर थे। वह वर्ष 2010 में दिल्ली में एसएसबी में भर्ती हुए थे और अपने मिलनसार स्वभाव के कारण गांव में सभी के प्रिय थे।
अंत्येष्टि के लिए जब शव पचरुखिया गंगा घाट पहुंचा और विधि-विधान की तैयारी शुरू हुई, तो परिजनों ने फिर शरीर पर चोट के निशान देखे। इससे आक्रोशित होकर परिजनों ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। सूचना पर थानाध्यक्ष हल्दी राजेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। उन्होंने एसएसबी बटालियन के कमांडेंट से भी संपर्क कर समाधान का प्रयास किया।
कमांडेंट ने आश्वासन दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। आश्वासन के बाद परिजन माने और शहीद जवान का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न कराया गया।

