फाल्गुन अमावस्या 2026: 17 फरवरी को करें स्नान-दान और पितृ तर्पण, जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

पंचांग के अनुसार फाल्गुन अमावस्या तिथि 16 फरवरी 2026 की शाम 5:34 बजे से प्रारंभ होकर 17 फरवरी 2026 की शाम 5:30 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर व्रत, स्नान-दान और पितरों का तर्पण 17 फरवरी 2026 को किया जाएगा। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। फाल्गुन मास की अमावस्या पितृ पूजन और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वज तृप्त होते हैं और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितृ दोष से मुक्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए भी यह तिथि महत्वपूर्ण मानी गई है।

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स्नान और तर्पण का महत्व

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फाल्गुन अमावस्या पर गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना फलदायी माना गया है। यदि तीर्थ पर जाना संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करना चाहिए। इसके बाद अन्न, वस्त्र और धन का दान पुण्यकारी माना जाता है।पीपल पूजन से पितृ प्रसन्नता

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शास्त्रों में पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया गया है। अमावस्या के दिन सुबह पीपल पर जल अर्पित करें और शाम को सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं। मान्यता है कि इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

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दान-पुण्य का विशेष फल

फाल्गुन अमावस्या पर तिल, अन्न और वस्त्र का दान करना विशेष फलदायी माना गया है। जरूरतमंदों को भोजन कराना और पितरों के नाम से दान देना शुभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि तिल और अन्न दान से पितृ दोष शांत होता है।

दीपदान से शांति और समृद्धि

अमावस्या की रात घर की छत या मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाना शुभ माना गया है। कहा जाता है कि दीपदान से पितरों को शांति मिलती है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गौ सेवा और जीवों को अन्न

इस दिन गाय को हरा चारा या रोटी खिलाना और कौवों सहित अन्य जीव-जंतुओं को अन्न देना भी पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इससे पूर्वज प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026 को श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाई जाएगी। इस दिन किए गए स्नान, दान, तर्पण और दीपदान जैसे कार्यों से पितृ कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

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