काशी में जीवंत हुई राजस्थान की लोक-संस्कृति

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। राजस्थान की माटी जब गंगा तट की हवाओं से मिलती है, तो संस्कृति का एक अद्भुत समागम जन्म लेता है। ऐसा ही दृश्य महमूरगंज स्थित शुभम् लॉन में देखने को मिला, जहां श्री गवरजा माता उत्सव समिति, वाराणसी के तत्वावधान में आयोजित सिंधारा कार्यक्रम में राजस्थानी लोकजीवन की रंग-बिरंगी छवियां सजीव हो उठीं। लगभग 200 महिलाओं और बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से काशी की फिजाओं में मानो थार के रेत कण बिखेर दिए। हर लय में लोक, हर भाव में भक्ति और हर रंग में परंपरा झलकती रही। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि भाव, भक्ति और परंपरा का ऐसा संगम बन गया, जिसमें काशी ने राजस्थान को अपने हृदय में समेट लिया और मरुधरा की खुशबू गंगा की लहरों संग दूर तक बह चली।
सायंकाल 5 बजे कार्यक्रम का शुभारम्भ एडीजी पुलिस वाराणसी पियूष मोडिया एवं विशिष्ट अतिथि श्रीमती स्वाति मित्तल (पत्नी सत्यमोहन, सीईओ कैण्टमेन्ट बोर्ड) द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। दीप की लौ जैसे-जैसे प्रज्वलित हुई, वैसे-वैसे वातावरण में श्रद्धा, सौंदर्य और सांस्कृतिक समर्पण की उजास फैलती चली गई। संस्था के अध्यक्ष कमल अग्रवाल एवं मंत्री राम बूबना ने स्वागत भाषण में कहा कि “गणगौर केवल पर्व नहीं, यह स्त्री-श्रद्धा, प्रेम और प्रकृति के प्रति समर्पण का जीवंत गीत है, जो पीढ़ियों से हमारे संस्कारों में गूंजता आया है।” उनके शब्दों में मानो परंपरा की गूंज थी, जो उपस्थित जनसमूह के हृदय में उतरती चली गई।
कार्यक्रम की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जैसे समय के पन्नों को पलट दिया। “मोरया रे… गणपति बप्पा मोरया” से आरंभ होकर “ओम नमः शिवाय”, “गोविन्द बोलो हरे गोपाल बोलो”, “नारी हूं मैं…” जैसे गीतों की श्रृंखला में भक्ति, नारीत्व और प्रकृति का अद्भुत समन्वय दिखा। “बुम्बरों बुम्बरो”, “ईसर जी की बारात” और “गणगौर तब से अब तक” जैसी प्रस्तुतियों ने सतयुग से कलयुग तक की सांस्कृतिक यात्रा को मंच पर साकार कर दिया। घाघरा-चुन्नी की लहराती छटा और पुरुषों के साफे की शान ने मानो काशी को कुछ पल के लिए राजस्थान में बदल दिया।
समिति के प्रचारमंत्री गौरव राठी ने जानकारी दी कि 21 मार्च को काशी गौशाला, गोलघर से लक्ष्मीकुण्ड स्थित श्री श्याम मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी और अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ किसी आवश्यक कार्यवश लखनऊ प्रस्थान कर गए, किन्तु उनका भेजा गया शुभकामना संदेश पूरे आयोजन का भावनात्मक शिखर बन गया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि “यह आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मां गवरजा का आशीर्वाद सभी पर बना रहे और यह उत्सव सबके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।” उनके शब्दों में जैसे आशीर्वाद की धारा बह रही थी, जिसने पूरे समारोह को एक आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन दीपक माहेश्वरी, पवन कुमार अग्रवाल, प्रीति बाजोरिया, ऋतु धूत, शानू जाजोदिया, पूजा चाण्डक, प्रीति मंत्री ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अजय खेमका एवं अतिथियों का स्वागत लाला चांडक ने किया।
इस अवसर पर कमल अग्रवाल, राम बूबना, आर. के. चौधरी, लोकेन्द्र करवा, उमाशंकर अग्रवाल, नवरतन राठी, पवन मोदी, दीपक बजाज, शंकरलाल सोमानी, गौरीशंकर नेवर, संजीव शाह, मांगीलाल सारडा, जेठमल चाण्डक, गौरव राठी, अनूप सर्राफ, ओमकार महेश्वरी, वेदमूर्ति शास्त्री, कौशल खण्डेलवाल, अशोक वर्मा, किशोर मुंदडा, कमलेश अग्रवाल, श्याम सुन्दर गाडोदिया, योगेश भुरारिया, गिरीराज कोठारी ,अजय काबरा गोविंद बजाज मदन मोहन अग्रवाल, सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

