किसी दल का समर्थन करना हिंदू होने की पहचान नहीं: जौनपुर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार को जौनपुर में हिंदू धर्म और राजनीति के संबंधों को लेकर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना हिंदू होने की पहचान नहीं हो सकता। उनका कहना था कि आज देश में ऐसी प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसमें किसी विशेष दल का समर्थन करने वाले को ही सच्चा हिंदू बताया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है।
शंकराचार्य अपनी ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ के तहत वाराणसी से निकलकर जौनपुर पहुंचे, जहां जनपद की सीमा में उनका स्वागत किया गया। नईगंज स्थित एक कॉम्प्लेक्स में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि गाय केवल हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया और सभी धर्मों के लिए माता के समान है।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य धर्मयुद्ध का आह्वान करना है। उनके अनुसार धर्मयुद्ध का मतलब हिंसा नहीं, बल्कि एक ऐसी रेखा खींचना है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कौन सच्चे धर्म के साथ खड़ा है और कौन केवल दिखावे के साथ।
शंकराचार्य ने कहा कि धर्म को राजनीति से जोड़कर देखना समाज के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या किसी राजनीतिक दल, खासकर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करने वाला ही हिंदू कहलाएगा? हिंदू होने की कसौटी किसी राजनीतिक दल से तय नहीं हो सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि आजकल समाज में कई लोग अचानक नेता, संत या संन्यासी बनकर सामने आ जाते हैं, लेकिन केवल वेशभूषा बदल लेने से किसी का आचरण नहीं बदलता। यदि कोई संत का वेश धारण करता है तो उसे उसी के अनुरूप आचरण भी करना चाहिए, क्योंकि समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों की होती है।
गौ संरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। बिना नाम लिए उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि केवल घोषणाओं और भाषणों से गौ माता की रक्षा संभव नहीं है। यदि सरकार वास्तव में गंभीर है तो उसे जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे।
उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में आज भी गौवंश की स्थिति चिंताजनक है और सड़कों पर घूमती गाएं इस बात का प्रमाण हैं कि गौ संरक्षण के लिए अभी बहुत काम किया जाना बाकी है।
गौरतलब है कि शंकराचार्य काशी से ‘धर्मयुद्ध’ का आह्वान करते हुए लखनऊ की यात्रा पर निकले हैं। इस यात्रा के जरिए धर्म और समाज से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

