UGC के नए नियमों के खिलाफ वाराणसी में उग्र प्रदर्शन, सवर्ण समाज का मार्च; संशोधन नहीं हुआ तो दिल्ली तक आंदोलन की चेतावनी

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। मंगलवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। सवर्ण समाज के युवाओं ने जिला मुख्यालय तक बड़ा मार्च निकाला और नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए प्रावधानों से सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ झूठे मामलों का खतरा बढ़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने नियमों को वापस नहीं लिया या उनमें संशोधन नहीं किया, तो आंदोलन दिल्ली तक ले जाया जाएगा।
जिला मुख्यालय के पास बड़ी संख्या में छात्र, युवा और संगठन के लोग जुटे। नारेबाजी के साथ UGC नियमों को वापस लेने की मांग की गई। धरना स्थल पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों की बात प्रदर्शनकारियों ने नहीं मानी और उन्हें लौटना पड़ा।
इस बीच, भाजपा के बूथ अध्यक्ष विकास कुमार मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बताया गया कि इस्तीफे का पत्र सामने आते ही उसे वापस लेने और डिलीट करने का दबाव भी बनाया गया।
कलेक्ट्रेट गेट पर धरने पर बैठीं रंजन सिंह ने UGC के संशोधित नियमों को “काला कानून” करार देते हुए कहा कि यह सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ है और इसके दुरुपयोग की आशंका बनी रहेगी। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां दिखाते हुए कहा कि जो सवर्ण और ब्राह्मण नेता व अधिकारी खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं, उनके लिए ये चूड़ियां प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को भेजी जाएंगी, ताकि सरकार तक नाराजगी पहुंचे।
बीएचयू में भी सवर्ण वर्ग के छात्र हाथों में पोस्टर लेकर डीन ऑफ स्टूडेंट्स से मिलने पहुंचे और चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति के पास विरोध दर्ज कराया। छात्रों का कहना है कि यह नियम केवल दो वर्गों के लिए बनाया गया है और इससे भेदभाव बढ़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियम वापस नहीं हुआ तो शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा।
प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई। कुछ नारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ भी लगे, जिनमें “योगी-मोदी मुर्दाबाद” और “हमारी भूल, कमल का फूल” जैसे नारे शामिल थे। मौके पर पहुंचे एसीपी प्रतीक कुमार से प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई।
सवर्ण समाज ने डीएम कार्यालय का घेराव किया और अधिकारियों के वाहनों को रोककर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि UGC का नया नियम समानता के सिद्धांत के खिलाफ है, छात्रों के हितों पर हमला है और युवाओं को जातिवाद की खाई में धकेलने की साजिश है।

