योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर तीखा हमला: बोले—धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करने वालों की बांग्लादेश पर चुप्पी
प्रयागराज, जनमुख न्यूज़। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। माघ मेला क्षेत्र के खाक चौक स्थित केशिविर में आयोजित जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज के 726वें प्राकट्य उत्सव में उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का ठेका लेकर चलने वाले लोग हिंदू समाज को तोड़ने में पूरी ताकत लगाते रहे हैं, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के नाम पर उनके मुंह बंद हैं। ऐसा लगता है मानो उनके मुंह पर किसी ने फेवीकोल या टेप लगा दिया हो।
मुख्यमंत्री ने रामानंदाचार्य जी के मूल मंत्र “जात-पात पूछे ना कोई, हरि को भजे सो हरि का होई” का उल्लेख करते हुए कहा कि जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांटना विनाश का कारण बनता है, जैसा आज बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है। उन्होंने लोगों से मत और संप्रदाय के नाम पर बंटने से बचने का आह्वान किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान रामानंदाचार्य ने समाज को जोड़ने का कार्य किया और अलग-अलग जातियों से द्वादश शिष्य बनाए। आज भी रामानंदाचार्य परंपरा से निकली विभिन्न धाराएं समाज को एकजुट रखने का काम कर रही हैं। उन्होंने साधु-संतों से अपील की कि समाज को तोड़ने वाली ताकतों को कभी पनपने न दिया जाए। अगर समाज एकजुट रहा तो आने वाला समय सनातन धर्म का होगा और तब बांग्लादेश जैसी घटनाएं दोहराई नहीं जा सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग समाज को बांटते हैं, वे कभी किसी के हितैषी नहीं हो सकते। सत्ता में रहते हुए उन्होंने केवल अपने परिवार के बारे में सोचा। उन्होंने चेताया कि ऐसे लोग नारे और स्लोगन तो देंगे, लेकिन मौका मिलने पर वही करेंगे जो पहले करते आए हैं—दंगे, हिंसा और पहचान का संकट पैदा करना। इसे दोहराने से रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, श्री बाघंबरी पीठ और श्री बड़े हनुमान मंदिर के महंत बलवीर गिरि महाराज, सतुआ बाबा पीठ काशी के पीठाधीश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा, निर्मोही अखाड़े के राजेंद्र दास सहित कई संत-महात्मा और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि स्वामी रामानंदाचार्य ने प्रयागराज में काफी समय व्यतीत किया था और दारागंज क्षेत्र में उनके स्थान की पहचान की जा रही है। स्थान चिन्हित होने के बाद सरकार उसके जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य कराएगी, ताकि उनकी परंपरा और संदेश को भव्य रूप से आगे बढ़ाया जा सके।


