पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को कोर्ट से बड़ी राहत, अंबरीश सिंह ‘भोला’ केस में मिली जमानत

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। चौक थाने में दर्ज एक मामले में आज़ाद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को शुक्रवार को अदालत से बड़ी राहत मिली। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें और बंधपत्र दाखिल करने पर उनकी रिहाई का आदेश दिया।
जमानत पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह मुकदमा राजनीतिक द्वेषवश और शासन-प्रशासन के दबाव में दर्ज कराया गया है। बचाव पक्ष ने कहा कि अमिताभ ठाकुर एक पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे हैं और प्रदेश सरकार की नीतियों व भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें जबरन सेवा से बर्खास्त किया गया। इसके बाद उन्होंने ‘आजाद अधिकार सेना’ नामक सामाजिक संगठन का गठन कर देश और प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों को उजागर करना शुरू किया, जिससे नाराज होकर उनके और संगठन के खिलाफ झूठे और फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अमिताभ ठाकुर द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट किसी की मान-प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं थी, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक के रूप में विधिसम्मत जांच की मांग के तहत सम्मानजनक भाषा में की गई थी।
वहीं अभियोजन और वादी के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपित के खिलाफ करीब 10 मामलों की हिस्ट्रीशीट है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अमिताभ ठाकुर को जमानत प्रदान कर दी।
गौरतलब है कि बड़ी पियरी निवासी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले हिंदू युवा वाहिनी के नेता तथा वीडीए के मानद सदस्य अंबरीष सिंह ‘भोला’ ने 9 दिसंबर को चौक थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट कर उनके खिलाफ आपराधिक मामलों और बहुचर्चित कफ सिरप प्रकरण में बिना साक्ष्य के संलिप्तता का आरोप लगाया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा।
इस मामले में पुलिस ने अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर और एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

