बुद्ध का संदेश दुनिया को दिखा रहा शांति और करुणा का रास्ता: जयवीर सिंह

सारनाथ, जनमुख न्यूज़। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सारनाथ में आयोजित ‘बौद्ध महोत्सव’ ने श्रद्धा, ज्ञान और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। भगवान बुद्ध की 2570वीं जयंती पर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश), महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंडो-श्रीलंका जम्बू द्वीप बुद्ध विहार, सारनाथ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस अवसर पर सारनाथ में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां देश-विदेश से आए 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बुद्ध अस्थि धातु के दर्शन किए। मूलगंध कुटी विहार में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के बाद “विश्व शांति के लिए तथागत बुद्ध” विषय पर निबंध, चित्रकला और पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विद्यालयों के 200 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और सांत्वना पुरस्कार दिए गए, वहीं सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
चित्रकला प्रतियोगिता में शीणा को प्रथम, सिद्धि जायसवाल को द्वितीय तथा आरव को तृतीय पुरस्कार तथा पांच अन्य प्रतिभागियों अंकित प्रजापति, अदिति भारद्वाज, सौभाग्य तिवारी, परी, आनंदी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी तरह निबंध प्रतियोगिता में रत्न प्रिया को प्रथम, पीहू सिंह को द्वितीय, लक्ष्मीना को तृतीय पुरस्कार तथा पांच अन्य प्रतिभागियों कृष्ण अवतार, आकांक्षा, दर्शिता पाण्डेय, सिमर प्रजापति, शीतला प्रसाद को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।कार्यक्रम के दौरान धम्म देशना, विपश्यना और परिचर्चा का भी आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के उपदेशों को व्यवहार में लाने पर जोर दिया।
श्रद्धालुओं के लिए पूरे दिन भोजन की भी व्यवस्था की गई, जिससे सेवा और करुणा का संदेश भी मजबूत हुआ।इस अवसर पर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ के इंचार्ज भिक्षु सुमित्थानंद, भिक्षु शीलवंश, संस्थान के सदस्य तरुणेश बौद्ध, डॉ. के. सिरी सुमेध थेरो, निदेशक डॉ. राकेश सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बिंजुलम पुण्यसार और शोध अधिकारी अरुणेश कुमार मिश्र सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए बुद्ध के विचारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा का दिन भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं लुंबिनी में जन्म, बोधगया में ज्ञान प्राप्ति और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण से जुड़ा है, जो इस दिन को और भी पवित्र बनाता है। उन्होंने बताया कि बुद्ध का संदेश पूरी दुनिया को शांति और करुणा का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने बताया सारनाथ में आयोजित ऐसे कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सहिष्णुता, जागरूकता और विश्व शांति का संदेश भी देते हैं। यह आयोजन नई पीढ़ी को भगवान बुद्ध के विचारों से जोड़ने और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम साबित हो रहा है। केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ एवं अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन शान्तरक्षित ग्रंथालय लॉन, सारनाथ में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के कुलपति प्रो. वड्छुग दोर्जे नेगी ने की। इस अवसर पर संस्थान की शोध पत्रिका “धी” का 66वां अंक तथागत बुद्ध को समर्पित करते हुए विमोचित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि पूज्य भिक्षु डॉ. के. सिरी सुमेध थेरो (जम्बूद्वीप श्रीलंका बौद्ध मंदिर, सारनाथ) मुख्य वक्ता रहे। सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. राकेश सिंह (निदेशक, अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्व भूषण मिश्र (सीईओ, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, वाराणसी) तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में पूज्य भिक्षु डॉ. जूलम्पिटिए पुण्यासार थेरो (सहायक आचार्य) ने अपने विचार रखे। इसके अलावा काशी के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों और संस्थान के विशेषज्ञों ने भी व्याख्यान देकर कार्यक्रम को समृद्ध किया।

