सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी

नई दिल्ली, जनमुख न्यूज़। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। उनकी भूख हड़ताल को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर बुधवार तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी की ओर से दाखिल की गई है।याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय निगरानी में उचित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में उनके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
सोनम वांगचुक 28 जुलाई से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। आंदोलनकारी पक्ष का आरोप है कि हाल के परीक्षा पेपर लीक मामलों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लंबे अनशन के कारण सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। उनका वजन काफी कम हो गया है और उन्हें शारीरिक कमजोरी तथा मांसपेशियों में दर्द की शिकायत है। इसके बावजूद उन्होंने अनशन जारी रखने का फैसला दोहराया है।
उधर, आंदोलन से जुड़े संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। इसके लिए छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है। आंदोलन की प्रमुख मांग परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की है।

