नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय, बिहार में नए मुख्यमंत्री की तलाश तेज; जदयू कार्यकर्ताओं में नाराज़गी

पटना, जनमुख न्यूज़। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलें लगभग साफ हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आगे की रणनीति तय करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी पटना पहुंचे। एयरपोर्ट पर खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया।
इसके बाद नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया के जरिए राज्यसभा जाने की बात की पुष्टि कर दी। माना जा रहा है कि उनके राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम पर जल्द ही फैसला हो सकता है। इस मुद्दे पर भाजपा और जदयू नेताओं के बीच लगातार बैठकें चल रही हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से हो सकता है, हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
उधर, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले से जदयू कार्यकर्ताओं में नाराज़गी देखने को मिल रही है। कई कार्यकर्ता जदयू कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने एमएलसी संजय गांधी की गाड़ी का घेराव कर नारेबाजी भी की। उनका कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नीतीश कुमार के चेहरे पर ही वोट मांगे थे, इसलिए जनता और कार्यकर्ताओं की राय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इस बीच बिहार विधानसभा में एनडीए के उम्मीदवारों ने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार ने नामांकन पर्चा दाखिल किया। इस मौके पर अमित शाह के अलावा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, मंत्री विजेंद्र यादव और विजय चौधरी सहित भाजपा और जदयू के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
नामांकन प्रक्रिया के बाद अमित शाह भाजपा विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करने के लिए स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है।
वहीं विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने आरोप लगाया कि बिहार में जनभावना के खिलाफ सत्ता परिवर्तन कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव में मशीन तंत्र का दुरुपयोग किया और अब नीतीश कुमार को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। तेजस्वी ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किस अधिकारी, मंत्री या केंद्रीय नेता ने नीतीश कुमार को इस फैसले के लिए मजबूर किया।
इस बीच केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार से मुलाकात की है। सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात में भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा हुई। चर्चा है कि निशांत कुमार को जनता दल यूनाइटेड की कमान सौंपी जा सकती है और उन्हें डिप्टी सीएम बनाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
अपने सोशल मीडिया संदेश में नीतीश कुमार ने लिखा कि पिछले दो दशकों से बिहार की जनता ने उन पर जो विश्वास जताया है, उसी के बल पर उन्होंने राज्य की सेवा की है। उन्होंने कहा कि उनके मन में लंबे समय से इच्छा थी कि वे संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी कारण उन्होंने इस बार राज्यसभा सदस्य बनने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि बिहार के विकास के लिए उनका सहयोग और मार्गदर्शन आगे भी जारी रहेगा।
वहीं Indian National Congress की बिहार इकाई ने इस घटनाक्रम को जनादेश के साथ विश्वासघात बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट लेकर सत्ता पर पूरी तरह कब्जा करने की योजना पहले से बना रखी थी। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक जनमत की हत्या करार दिया और कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में जदयू के कुछ नेता भी शामिल हैं।

