लोकसभा में महिला आरक्षण-परिसीमन संशोधन विधेयक गिरा, दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई सरकार

नई दिल्ली, जनमुख न्यूज़। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लंबी बहस के बाद शुक्रवार (17 अप्रैल) को मतदान हुआ, लेकिन सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में असफल रही। कुल 528 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया, जिसमें 298 ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। हालांकि, संविधान संशोधन पारित करने के लिए जरूरी 352 मत नहीं मिल सके।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका और इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने इससे जुड़े अन्य दो विधेयकों पर भी मतदान नहीं कराने का फैसला लिया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस नतीजे पर निराशा जताते हुए कहा कि यह महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने से जुड़ा ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन विपक्ष ने साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए आगे भी प्रयास जारी रखेगी।
करीब 21 घंटे चली चर्चा में 130 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिनमें 56 महिला सांसद भी शामिल रहीं। बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि परिसीमन का विरोध करने वाले दरअसल एससी-एसटी सीटों की संख्या बढ़ाने के खिलाफ हैं। उन्होंने धर्म के आधार पर आरक्षण की संभावना को खारिज करते हुए राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर आश्वासन भी दिया।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विधेयक गिरने के बाद कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि चुनावी व्यवस्था में बदलाव का प्रयास था, जिसे विपक्ष ने मिलकर रोक दिया।
विधेयक में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने और 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव शामिल था। यह पिछले 12 वर्षों में पहला मौका है जब केंद्र सरकार का कोई संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका।

