आप RSS से जुड़े संगठन के कार्यक्रमों में जाती हैं, आप से नहीं मिल सकता न्याय, हाईकोर्ट में केजरीवाल ने जज हटाने की मांग पर रखा पक्ष

नई दिल्ली, जनमुख न्यूज़। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल शराब नीति मामले में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान Delhi High Court पहुंचे, जहां उन्होंने अदालत में खुद अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में भारी भीड़ देखने को मिली। वहीं सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू मौजूद रहे।
सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने अदालत को संबोधित करते हुए कहा कि वह न्यायालय और न्यायमूर्ति का सम्मान करते हैं। इस पर बेंच ने कहा कि सम्मान पारस्परिक होता है और उन्हें मुद्दे पर केंद्रित रहना चाहिए। इसके बाद केजरीवाल ने कहा कि वह एक आरोपी के तौर पर अदालत के सामने खड़े हैं, हालांकि ट्रायल कोर्ट उन्हें पहले ही बरी कर चुका है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह जज के रिक्यूजल (स्वयं को अलग करने) से जुड़े मुद्दे पर ही अपनी बात रखें।
केजरीवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जज महोदय आरएसएस से जुड़े संगठन अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में जाती रहती है, हो सकता है उनके मन में आरएसएस के विचारों के प्रति सिंपैथी हो जबकि वह दूसरी विचारधारा को मानने वाले हैं ऐसे में उनके मन में न्याय को लेकर संदेह पैदा होता है।
इस दौरान कोर्ट ने यह भी नोट किया कि एक वकील केजरीवाल की सहायता कर रहा है, जबकि उन्होंने पहले कहा था कि उन्होंने किसी वकील को अधिकृत नहीं किया है। इस पर अदालत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति प्रॉक्सी के रूप में पेश नहीं हो सकता।
सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने आरोप लगाया कि 9 मार्च को सीबीआई की याचिका पर बिना प्रतिवादी की मौजूदगी में आदेश पारित किया गया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े मामले में 4 हजार पन्नों की चार्जशीट को बिना पूरी तरह पढ़े टिप्पणी करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने अदालत के सामने कई कारण गिनाते हुए यह आशंका जताई कि सुनवाई निष्पक्ष नहीं हो सकती।
इस पर जस्टिस शर्मा ने पूछा कि क्या वह राजनीतिक पक्षपात का भी आरोप लगा रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर उचित आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की सुनवाई असामान्य गति से हो रही है, जबकि अन्य मामलों में ऐसा नहीं देखा जाता।
सुनवाई के दौरान माहौल उस समय थोड़ा तनावपूर्ण हो गया जब जस्टिस शर्मा ने कोर्ट की कार्यवाही में व्यवधान पर नाराजगी जताई और सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इससे पहले पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि अदालत कोई “नाटक का मंच” नहीं है और लगाए गए आरोप निराधार हैं।
गौरतलब है कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, Manish Sisodia समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। हालांकि इसके खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर अब सुनवाई जारी है।

