उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब साल में सिर्फ 4 गैस सिलिंडर पर मिलेगी सब्सिडी

नई दिल्ली, जनमुख न्यूज़। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली एलपीजी सब्सिडी में बड़ा बदलाव किया है। अब योजना के तहत लाभार्थियों को सालभर में 12 की जगह केवल चार रसोई गैस सिलिंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण माल खनूजा ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के तहत शुरुआत में लाभार्थियों को प्रतिवर्ष 12 सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के सिलिंडर दिए जाते थे। बाद में इस संख्या को घटाकर नौ किया गया और अब इसे चार तक सीमित कर दिया गया है।
सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति सिलिंडर 200 रुपये की सब्सिडी देना शुरू किया था, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया। वर्तमान में दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत 942 रुपये है। ऐसे में सब्सिडी के बाद उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को एक सिलिंडर के लिए 642 रुपये चुकाने होंगे।
सरकार का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की औसत वार्षिक खपत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार अधिकांश लाभार्थी साल में सीमित संख्या में ही सिलिंडर का उपयोग करते हैं, इसलिए सब्सिडी को वास्तविक खपत के अनुरूप किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की बढ़ती कीमतों को भी इस फैसले की एक प्रमुख वजह बताया गया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसके चलते घरेलू एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक पहुंच गई है। भारत की आयात लागत सऊदी अनुबंध मूल्य से जुड़ी है, जिसमें फरवरी के बाद करीब 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 से अब तक उज्ज्वला योजना के तहत करीब 52 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है। इसके बावजूद तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलिंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं पेट्रोल और डीजल की बिक्री में भी कंपनियों को क्रमशः लगभग 6 रुपये और 30 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा है।
सरकार का मानना है कि बढ़ती वैश्विक कीमतों और सब्सिडी के बढ़ते बोझ को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक हो गया था। हालांकि इस बदलाव का असर सीधे तौर पर उज्ज्वला योजना से जुड़े करोड़ों परिवारों पर पड़ सकता है।

