विंध्य एक्सप्रेस-वे के रूट पर सांसद वीरेंद्र सिंह ने उठाए सवाल, पीएम और सीएम से किया हस्तक्षेप का आग्रह

वाराणसी/चंदौली, जनमुख न्यूज़। चंदौली से सांसद वीरेंद्र सिंह ने प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित मार्ग पर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सांसद ने अपने ज्ञापन में कहा कि चंदौली पूर्वांचल का “धान का कटोरा” माना जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे यदि बरहनी ब्लॉक सहित कई गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि से होकर गुजरता है, तो हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण होगा और बड़ी संख्या में किसान परिवार प्रभावित होंगे। इससे क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतमाला परियोजना के तहत पहले से ही एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण पंचफेड़वा से कुमारपुर होते हुए गाजीपुर के जमनिया तक किया जा रहा है। ऐसे में महज 3-4 किलोमीटर की दूरी पर समानांतर विंध्य एक्सप्रेस-वे का निर्माण आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं है।
सांसद ने कहा कि नरवन, महाईच, परना, बरहनी, खगवल सहित कई गांवों के किसान पिछले कई महीनों से “भूमि बचाओ आंदोलन” चला रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब एक एक्सप्रेस-वे पहले से बन रहा है, तो दूसरी परियोजना के लिए उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण अनावश्यक है। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन ने भी प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर इस योजना पर पुनर्विचार की मांग की है।
सांसद की प्रमुख मांगें
-प्रस्तावित मार्ग के वर्तमान सर्वे का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
-उपजाऊ कृषि भूमि से गुजर रहे रूट का पुनर्विचार कर वैकल्पिक मार्ग तय किया जाए।
-किसानों की आजीविका और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
-सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास मॉडल अपनाया जाना चाहिए जो किसानों की आजीविका, उपजाऊ भूमि और पर्यावरण की रक्षा करते हुए आगे बढ़े।
उन्होंने ज्ञापन की प्रति केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भी भेजी है। क्षेत्र में चल रहे किसान आंदोलन के बीच सांसद की इस पहल को किसानों की मांगों के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। किसानों को उम्मीद है कि इससे प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के मार्ग पर पुनर्विचार की संभावना बढ़ेगी।

