समान शिक्षा की मांग को लेकर पदयात्रा गंजारी पहुंची, किसानों ने किया जोरदार स्वागत

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर निकली तीन दिवसीय पदयात्रा मंगलवार को जनकवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की जन्मस्थली खेवली से आगे बढ़ते हुए लोकबंधु राजनारायण की जन्मस्थली गंजारी गांव पहुंची। यहां किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों ने पदयात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा किसान–मजदूर सभा का आयोजन किया गया।
“चाहे अमीर की हो या गरीब की संतान, सबकी शिक्षा हो समान” के नारे के साथ निकली इस पदयात्रा का दूसरे दिन का सफर कोरौती गांव से शुरू हुआ। यात्रा विभिन्न गांवों से गुजरते हुए गंजारी पहुंची, जहां लोकबंधु राजनारायण को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा को संबोधित करते हुए मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी डॉ. संदीप पांडे ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में लगातार किए जा रहे बदलावों का सबसे अधिक असर गरीब, ग्रामीण और सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को प्रयोग का विषय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक नीति के रूप में देखा जाना चाहिए।लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त हैं और हजारों सरकारी विद्यालय बंद हो चुके हैं, जबकि निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है।किसान नेता वीरेंद्र यादव ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती समान शिक्षा, सामाजिक न्याय और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। वहीं सतना से आए किसान नेता ईश्वर चंद त्रिपाठी ने शिक्षा के बढ़ते निजीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा को बाजार की वस्तु नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार माना जाना चाहिए।
गंजारी में आयोजित सभा के दौरान स्थानीय किसानों ने क्षेत्र में प्रस्तावित स्पोर्ट्स स्टेडियम और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। किसान संघर्ष समिति के अजीत वर्मा ने कहा कि किसानों की सहमति, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास के बिना भूमि अधिग्रहण लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
वक्ताओं ने कहा कि समान शिक्षा, किसानों-मजदूरों के अधिकार, रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इन मूल्यों को आगे बढ़ाना ही मुंशी प्रेमचंद, धूमिल, लोकबंधु राजनारायण और आचार्य नरेंद्र देव की वैचारिक विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यात्रा में किसान नेता, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पदयात्रा का अंतिम चरण 15 जुलाई को गंजारी से शुरू होकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संपन्न होगा।

