पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को नोटिस; जंतर-मंतर पर RAF के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश

नई दिल्ली, जनमुख न्यूज़ डेस्क। नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही अदालत ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के गोला-बारूद का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आज़ाद और कथित रूप से पैलेट गन से घायल हुए दो लोगों द्वारा दायर याचिकाओं में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन हथियारों को भले ही “कम घातक” बताया जाता हो, लेकिन नजदीक से चलाए जाने पर ये गंभीर और स्थायी चोट पहुंचा सकते हैं।
याचिका में 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल 19 वर्षीय साहिल लोचाब का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि पैलेट लगने से उनकी आंख गंभीर रूप से प्रभावित हुई। याचिकाकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र की उन गाइडलाइंस का भी हवाला दिया, जिनमें भीड़ को तितर-बितर करने के लिए धातु के छर्रों वाली पैलेट गन के इस्तेमाल को आवश्यकता, अनुपात और तर्कसंगतता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना गया है।
मामले में 25 वर्षीय कलाकार प्रशांत कुमार सिंह और 26 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी भी याचिकाकर्ता हैं। दोनों का दावा है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित पैलेट फायरिंग के दौरान वे घायल हुए थे।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुए सभी लोगों, विशेष रूप से पैलेट गन से कथित रूप से घायल व्यक्तियों का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरडी) की एडवाइजरी के अनुसार असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति है। ऐसे में पैलेट गन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है। फिलहाल अदालत ने मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

