यूपी कैबिनेट ने मजदूरी संहिता-2026 को दी मंजूरी, सभी श्रमिकों को मिलेगा न्यूनतम वेतन का अधिकार

लखनऊ, जनमुख न्यूज़। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता-2026 को मंजूरी दे दी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद न्यूनतम मजदूरी का अधिकार अब केवल अनुसूचित नियोजनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी पात्र श्रमिकों को इसका लाभ मिलेगा। यानी किसी भी क्षेत्र या संस्थान में कार्यरत श्रमिक को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं किया जा सकेगा।
नई संहिता केंद्र सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिताओं के अनुरूप तैयार की गई है। इसमें न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान, समान पारिश्रमिक और बोनस से संबंधित प्रावधानों को एकीकृत किया गया है। अब मजदूरी का निर्धारण अनुसूचित नियोजन के बजाय श्रमिक के कौशल, कार्य की प्रकृति और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर होगा। साथ ही, समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत भी प्रभावी रहेगा।
संहिता के तहत कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मूल वेतन होगा, जिससे कर्मचारियों को पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ अधिक मिलेंगे। सेवा समाप्त होने की स्थिति में श्रमिक का बकाया दो कार्यदिवस के भीतर चुकाना अनिवार्य होगा। ओवरटाइम के लिए सामान्य मजदूरी की दोगुनी दर से भुगतान करना होगा और वैधानिक कटौतियां कुल वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगी। वेतन भुगतान से पहले वेतन पर्ची देना भी अनिवार्य किया गया है।
नई व्यवस्था में संविदा श्रमिकों की मजदूरी और बोनस के भुगतान की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी। वहीं, कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसका बकाया नामित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को दिया जाएगा।
संहिता में नियोक्ताओं के लिए भी कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। अनुपालन का बोझ कम करने के लिए रजिस्टर और प्रपत्रों की संख्या घटाई गई है, ऑनलाइन विवरणी की व्यवस्था की गई है तथा पहली बार नियम उल्लंघन पर उपशमन का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, विवादों की स्थिति में अब अपील हाईकोर्ट के बजाय विभागीय अधिकारियों के समक्ष की जा सकेगी।

