फर्जी टोल वसूली मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 14 ठिकानों पर छापेमारी; वाराणसी में एक आरोपित हिरासत में

लखनऊ/वाराणसी, जनमुख न्यूज़। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के विभिन्न टोल प्लाजा पर फर्जी सॉफ्टवेयर और अन्य माध्यमों से टोल वसूली में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय की अगुवाई में उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों में 14 टोल प्लाजा और उनके संचालकों से जुड़े 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 22 जनवरी 2025 को पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। कार्रवाई के दौरान वाराणसी में भी एक आरोपित को हिरासत में लिए जाने की चर्चा है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ईडी की टीम ने बड़ागांव क्षेत्र के काजीसराय स्थित साईंगांव के एक अपार्टमेंट से आलोक कुमार सिंह को हिरासत में लिया है। स्थानीय लोगों ने भी ईडी की टीम के पहुंचने की जानकारी दी है।
फर्जी सॉफ्टवेयर से टोल वसूली का आरोप
मामला पिछले वर्ष वाराणसी समेत विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर संचालित टोल प्लाजा में कथित बड़े फर्जीवाड़े से जुड़ा है। पुलिस जांच में सामने आया था कि कुछ टोल कर्मी अधिकृत टोल राशि का केवल 5 से 10 प्रतिशत ही संबंधित खाते में जमा करते थे, जबकि शेष रकम कथित तौर पर दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती थी।
जांच में फर्जी चिप और फास्टैग के जरिए भारी वाहनों को टोल टैक्स दिए बिना निकालने और बिना फास्टैग अथवा कम बैलेंस वाले वाहनों से वसूली गई रकम को अधिकृत खाते में जमा न करने के आरोप भी सामने आए थे।
अनधिकृत सॉफ्टवेयर से बनाई जाती थी रसीद
ईडी की जांच के अनुसार कुछ टोल कर्मियों ने कथित तौर पर बिना अनुमति वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर टोल की रसीदें तैयार कीं और वसूली गई रकम को दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित किया। इससे संबंधित रकम आधिकारिक लेखा प्रणाली में दर्ज नहीं हो पाती थी।
ईडी अधिकारियों के मुताबिक फॉरेंसिक जांच और एनएचएआई के रिकॉर्ड से भी अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। इस मामले में आलोक सिंह नामक आरोपित की पहले वाराणसी से गिरफ्तारी हुई थी, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की।
18 से अधिक टीमों ने की कार्रवाई
बुधवार को ईडी की 18 से अधिक टीमों ने विभिन्न स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई का उद्देश्य टोल वसूली से संबंधित फर्जी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाना है।
ईडी अब टोल वसूली से संबंधित रिकॉर्ड की जांच के आधार पर कथित अवैध रकम के लाभार्थियों और धन के लेन-देन की कड़ियों का पता लगाएगी। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

