आईपीएल बेटिंग के नाम पर 700 करोड़ की ठगी का भंडाफोड़, वाराणसी से अंतरराज्यीय गिरोह के 13 सदस्य गिरफ्तार

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। सोशल मीडिया के जरिए आईपीएल में निवेश और भारी मुनाफे का झांसा देकर देशभर के करीब दो लाख लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का वाराणसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच और कैंट थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के स्थानीय सरगना समेत 13 आरोपियों को टकटकपुर स्थित एक फ्लैट से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 17 मोबाइल फोन, 10 लैपटॉप, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े डिजिटल वॉलेट और लगभग एक करोड़ रुपये की राशि बरामद की है। जांच में सामने आया है कि मुंबई से संचालित “मलिक फर्म” के माध्यम से आईपीएल बेटिंग और निवेश के नाम पर करीब 700 करोड़ रुपये का नेटवर्क खड़ा किया गया था।
अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का स्थानीय संचालक रितेश दिवाकर शुक्ला शामिल है, जो मूल रूप से वाराणसी के कपसेठी क्षेत्र का निवासी है और वर्तमान में मुंबई के पालघर जिले में रह रहा था। उसके साथ उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के विभिन्न जिलों के अन्य सदस्य भी पकड़े गए हैं।
सोशल मीडिया के जरिए फंसाते थे लोग
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर फर्जी विज्ञापन चलाते थे। निवेशकों को आईपीएल बेटिंग ऐप में पैसा लगाने पर भारी रिटर्न का लालच दिया जाता था। लोगों को टेलीग्राम चैनलों से जोड़कर निवेश करवाया जाता था, जबकि गिरोह के स्थानीय एजेंटों को कुल रकम का छह प्रतिशत कमीशन मिलता था।
डीसीपी अपराध नीतू कात्यायन ने बताया कि अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और चर्चित चेहरों का भी इस्तेमाल किया जाता था। गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान और नेपाल तक फैला हुआ था।
हवाला और क्रिप्टो के जरिए खपाया जाता था पैसा
पूछताछ में खुलासा हुआ कि ठगी से प्राप्त धनराशि हवाला नेटवर्क के जरिए मुंबई से वाराणसी और लखनऊ भेजी जाती थी। इसके बाद रकम को क्रिप्टोकरेंसी और रियल एस्टेट में निवेश कर सफेद किया जाता था। पुलिस को जानकारी मिली है कि हाल ही में लखनऊ में लगभग 75 लाख रुपये की एक जमीन की रजिस्ट्री भी इसी नेटवर्क से जुड़े लोगों ने कराई थी।
पूर्वांचल, बिहार और नेपाल तक फैला था नेटवर्क
कैंट थाना और क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि वाराणसी को गिरोह ने अपना प्रमुख ऑपरेशन सेंटर बना रखा था। यहां से पूर्वांचल, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और नेपाल के लोगों को बेटिंग नेटवर्क से जोड़ा जा रहा था। स्थानीय स्तर पर रितेश शुक्ला और उसका सहयोगी रवि यादव पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है। गिरोह के अन्य सदस्यों और मुख्य संचालक “मलिक” की तलाश में विभिन्न राज्यों में दबिश दी जा रही है। साथ ही ठगी की रकम, हवाला नेटवर्क और क्रिप्टो निवेश की परतें भी खंगाली जा रही हैं।

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