ककरमत्ता की ऐतिहासिक पोखरी बनेगी नया पर्यटन केंद्र, 38 साल पुराने विवाद के बाद शुरू हुआ कायाकल्प

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। बीएलडब्ल्यू रोड स्थित ककरमत्ता की ऐतिहासिक पोखरी अब नए स्वरूप में विकसित होगी। नगर निगम ने करीब 38 वर्षों से विवादित रही इस सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद इसके पुनरुद्धार का कार्य तेज कर दिया है। लगभग डेढ़ बीघा क्षेत्रफल में फैली इस ऐतिहासिक पोखरी को पर्यटन स्थल और आकर्षक पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां रंग-बिरंगी लाइटें, फव्वारे और हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे यह स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगी।
नगर निगम के अनुसार, ककरमत्ता स्थित अराजी संख्या-411 पर वर्ष 1988 से कानूनी विवाद चल रहा था। अतिरिक्त उपजिलाधिकारी (सदर) की अदालत ने राजस्व अभिलेखों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद निजी दावे को खारिज करते हुए भूमि को सार्वजनिक उपयोग की ‘पोखरी’ घोषित किया। अदालत ने अवैध खातों को निरस्त कर अभिलेखों में दोबारा पोखरी दर्ज करने का आदेश दिया।पुनरुद्धार कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे महापौर अशोक कुमार तिवारी ने अधिकारियों को निर्धारित समय में काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोखरी को उसके मूल स्वरूप में लाकर पर्यावरण संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है।
वर्तमान में स्थल पर तीन जेसीबी, तीन पोकलैंड मशीनों और 46 डंपर-हाइवा की मदद से गहरीकरण और सफाई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। नगर निगम का कहना है कि लंबे समय से कूड़े और मलबे से पटी इस पोखरी को पूरी तरह पुनर्जीवित किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान पार्षद मदन मोहन तिवारी, श्याम आसरे मौर्य, विनीत सिंह, अतुल पांडेय, सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव, मुख्य अभियंता (सामान्य) सुरेश चंद्र, मुख्य अभियंता (स्मार्ट सिटी) अमरेंद्र तिवारी सहित नगर निगम के कई अधिकारी मौजूद रहे। नगर निगम का दावा है कि परियोजना पूरी होने के बाद ककरमत्ता पोखरी वाराणसी के प्रमुख पर्यटन एवं पर्यावरणीय स्थलों में शामिल होगी।

