सावरकर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, भविष्य में बयान देने पर दी चेतावनी

नई दिल्ली, जनमुख न्यूज़। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। यह मामला नवंबर 2022 का है, जब राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अकोला में एक रैली में सावरकर को लेकर विवादित बयान दिया था।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और मनमोहन की बेंच ने राहुल गांधी को गैर-जिम्मेदार बयान देने से बचने की नसीहत दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ किसी भी तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान बेंच ने उदाहरण देते हुए कहा कि महात्मा गांधी भी वायसराय को पत्र लिखते समय ‘आपका आज्ञाकारी सेवक’ लिखते थे, लेकिन इससे वे सेवक नहीं हो जाते।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि इस तरह की टिप्पणी दोहराई गई तो स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी। बेंच ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजादी दिलाई है और उनके प्रति इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।
यह टिप्पणी उस समय आई जब अदालत राहुल गांधी की 2022 के मानहानि मामले को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आश्वासन दिया कि वे भविष्य में ऐसे बयान नहीं देंगे।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153-ए और 505 के तहत पेश होने के लिए तलब किया गया था।
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी को राहत देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा था कि उनके पास निचली अदालत के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का वैधानिक विकल्प मौजूद है, इसलिए हाईकोर्ट इस मामले में अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करेगा।
गौरतलब है कि आईपीसी की धारा 153-ए विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने से संबंधित है, जबकि धारा 505 सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयानों से जुड़ी हुई है।

