भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर को मंदिर माना; मुस्लिम पक्ष के लिए अलग जमीन देने के निर्देश

भोपाल/धार, जनमुख न्यूज़। मध्य प्रदेश के धार स्थित बहुचर्चित भोजशाला विवाद में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अपने आदेश में कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा और पूजा-अर्चना का केंद्र रहा है।
हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने मामले से जुड़ी पांच याचिकाओं, एक रिट अपील और अन्य हस्तक्षेप आवेदनों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि परिसर में हिंदू पूजा-पद्धति की निरंतरता कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकार सीमित किए गए थे और मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि भोजशाला एवं कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक घोषित है और इसका धार्मिक स्वरूप वाग्देवी सरस्वती मंदिर का है।
साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मुस्लिम पक्ष के लिए मस्जिद निर्माण हेतु अलग जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि भोजशाला परिसर का संरक्षण आगे भी ASI के अधीन जारी रहेगा।इस मामले में हिंदू पक्ष की ओर से संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत पूजा-अर्चना के अधिकार का हवाला देते हुए नियमित पूजा की अनुमति मांगी गई थी। वहीं मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया था कि परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में इस्तेमाल होता रहा है और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट के पास है।
मामले की सुनवाई के दौरान ASI की सर्वे रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर 2024 में परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे कराया गया था।फैसले को देखते हुए धार जिले में प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जिले में धारा 163 लागू कर पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी गई है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और अफवाह फैलाने वालों पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है।

