वाराणसी पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बोले— ‘धर्म के नाम पर भ्रम फैलाने वाले कालनेमियों को पहचानना जरूरी’

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। गोरक्षा के समर्थन में निकाली जा रही 81 दिवसीय ‘गविष्ठी गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ के तहत बुधवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वाराणसी पहुंचे। शहर में उनके आगमन पर श्रद्धालुओं और समर्थकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों और जयघोष के साथ भव्य स्वागत किया। कई स्थानों पर कलश यात्रा भी निकाली गई।यात्रा के दौरान आयोजित सभाओं में शंकराचार्य ने “कालनेमियों को पहचानो” विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों की पहचान करना है, जो धार्मिक वेशभूषा और नारों के सहारे लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केवल माथे पर तिलक लगाने या भगवा वस्त्र पहन लेने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। सच्चा धर्म व्यक्ति के आचरण, संवेदना और विचारों में दिखाई देता है।शंकराचार्य ने गो हत्या और मांस निर्यात के मुद्दे पर सरकारों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि गोरक्षा के नाम पर राजनीति की जा रही है और बीफ निर्यात को लेकर लोगों में भ्रम फैलाया जाता है। उनका कहना था कि कई मामलों में जांच के दौरान गोमांस की पुष्टि हुई है, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि गो हत्या महापाप है और इसमें केवल हत्या करने वाला ही नहीं, बल्कि उसका समर्थन करने वाला, अनुमति देने वाला और उससे लाभ लेने वाला भी समान रूप से पाप का भागीदार होता है।
यात्रा के दौरान रोहनिया, लंका, सिगरा, कचहरी और जाल्हूपुर सहित कई स्थानों पर सभाएं आयोजित की गईं। मीडिया प्रभारी संजय पांडेय के अनुसार, यात्रा गुरुवार को अजगरा, पिंडरा और सेवापुरी होते हुए भदोही के लिए रवाना होगी।

