महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प अब जमीन पर उतर रहा है- स्मृति ईरानी

वाराणसी, जनमुख न्यूज़। गिरजादेवी सांस्कृतिक संकुल सभागार में 17 अप्रैल को ‘नारी शक्ति वंदन, सशक्त नारी-सशक्त भारत’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर महिला आरक्षण कानून यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए लोकतंत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में स्मृति ईरानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प अब जमीन पर उतर रहा है। उन्होंने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘उज्ज्वला योजना’ और ‘मातृ वंदना योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं से महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार आया है।उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के सम्मान और अधिकारों का प्रतीक है। इसके लागू होने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिससे नीति निर्धारण में उनकी भागीदारी और मजबूत होगी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि काशी की धरती हमेशा से नारी शक्ति की उपासक रही है। उन्होंने महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने को विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी बताया। साथ ही कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं बिना भेदभाव सभी वर्गों की महिलाओं तक पहुंच रही हैं।
कार्यक्रम में नीरजा माधव, मीना चौबे, पूनम मौर्य, आनंद प्रभा, अपराजिता सोनकर, साधना वेदांती, मृदुला जायसवाल, निर्मला सिंह पटेल और पद्मश्री से सम्मानित भरतनाट्यम कलाकार नलिनी-कमलिनी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। संचालन रचना अग्रवाल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन साधना वेदांती ने दिया।
इसके अलावा क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, जिला अध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी, राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल और अन्य जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।सभागार में बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं ने महिला आरक्षण कानून के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के संकल्प के साथ हुआ।

